Menu

फ्री में रु.1000 का मोबाइल रिचार्जे करे, 100% working!

mobile repairing in hindi full course,mobile repairing course,mobile repairing institute in delhi,mobile,mobile repairing course hindi,mobile repairing course in delhi,mobile repairing in hindi,mobile repair course in delhi,mobile repair training course in delhi,mobile repair training in hindi,mobile training course in delhi,mobile free course hindi,tablet pc repairing course in delhi
Mobile Repairing in Hindi Full course Training Delhi

Free Mobile Repair Training Course in Delhi

Mobile Phone वर्तमान समय में हम सभी की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है। बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के छोटे गांवों तक हर जगह बगैर मोबाइल के जिन्दगी की कल्पना करना भी मश्किल है। विगत 15 वर्षों में भारत में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या इतनी तेज गति से बढ़ी है कि वर्तमान में भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने वाला देश बन गया है। कीमत में तेज गिरावट और बेहतर फीचर्स मिलने की वजह से मोबाइल फोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से गाँवों से लेकर महानगरों तक के हर गली-मोहल्ले में मोबाइल फोन रिपेयर करने वाले मिल जाते हैं।

गौरतलब है कि Mobile Phone Repairing के मामले में Basic Handsets की मरम्मत करने वाले तो आसानी से मिल जाते हैं, परंतु महंगे और ब्रांडेड स्मार्टफोन रिपेयर करवाने के लिए लोगों को काफी परेशान होना पड़ता है। बाजार में स्मार्टफोन की रिपेयरिंग करने वाले कुशल टेक्निशियनों की बहुत कमी है। यदि आप मोबाइल फोन रिपेयरिंग के क्षेत्र में चमकीला करियर बनाने का सपना देख रहे हैं, तो आप खास तरह की ट्रेनिंग लेकर पूरे आत्मविश्वास के साथ महंगे हैंडसेट्स की रिपेयरिंग में भी महारत हासिल कर सकते हैं और अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।

मोबाइल फोन रिपेयरिंग का काम एक ऐसा काम है, जिसे बगैर प्रशिक्षण के नहीं किया जा सकता है। आमतौर पर एक मोबाइल फोन में की-पैड, चार्जिंग, माइक, रिंगर, स्पीकर, कैमरा, पावर स्विच, टच स्क्रीन, डिस्प्ले स्क्रीन, नेटवर्क, ब्लूटूथ, वायफाई, मोबाइल फोन हैंग से जुड़ी समस्याएं आती हैं। मोबाइल फोन की मरम्मत | करने के काम में फोन के हरेक हिस्से से परिचित होना बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको बेसिक कॉम्पोनेंट्स जानने होंगे, अर्थात मोबाइल के ऐसे पुर्जे, जिनका इस्तेमाल मोबाइल के मदर बोर्ड अथवा सर्किट में किया जाता है। किसी भी सस्ते अथवा महँगे मोबाइल को ठीक करने के लिए मोबाइल के बेसिक कॉम्पोनेंट्स जैसे कि रेजिस्टेंस, क्वाइल, कंट्रोलर, फ्यूज, माइक को पहचानना और उसकी कार्य प्रणाली समझना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि सभी स्मार्टफोन में ऑपरेटिंग सिस्टम, डिस्प्ले, टच स्क्रीन, 3जी/4जी, डबल सिम, एचडी डिस्प्ले, रैम, प्रोसेसिंग, जीपीएस नेविगेशन, स्क्रीन रिजोल्यूशन, एक्टिविटी ट्रैकिंग, प्रोसेसर, कैमरा, | पॉवर बैकअप आदि जैसे फीचर्स होते ही हैं। ब्रांडेड मोबाइल में फीचर्स एक दूसरे से कुछ हद तक अलग-अलग होते हैं। वहीं कुछ फीचर्स एक दूसरे से काफी हद तक मिलते-जुलते भी होते हैं। ऐसे में अगर बारीकी से सभी फीचर्स और उनकी कार्यप्रणाली को समझ लिया जाए, तो इन्हें ठीक करना बहुत आसान हो जाता है। इस समय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम भी काफी तेजी से बदल रहे हैं। अधिकांश स्मार्टफोन में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। जबकि कुछ । अन्य में जैसे कि एप्पल में आईओएस, | माइक्रोसॉफ्ट में विंडोज तथा ब्लैकबेरी में ओएस | 10 ऑपरेटिंग सिस्टम होता है। पहले लॉलीपॉप जेलीबीन किटकैट जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम थे। अब पाई, ओरियो जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम बाजार में आ गए हैं। मोबाइल फोन की तकनीक में बहुत तेजी से बदलाव हो रहा है। हर दिन नए नए सॉफ्टवेयर और नए-नए फीचर्स बाजार में आ रहे हैं। खासकर बड़ी-बड़ी कंपनियां हर नए मोबाइल के साथ कुछ नए फीचर्स ला रही हैं। हर दिन बदलने वाले इन फीचर्स और तकनीकों से मोबाइल फोन रिपेयरिंग करने वाले को अपडेट रहना होता है।

उल्लेखनीय है कि मोबाइल फोन में दो प्रकार की दिक्कत देखने को मिलती हैं-सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की। मोबाइल फोन में कोई भी समस्या उत्पन्न होने पर सबसे पहले सॉफ्टवेयर पर ध्यान दें। उदाहरण के लिए अगर मोबाइल में रिंगटोन  की समस्या है तो सबसे पहले उसके सॉफ्टवेयर की जांच कर लें। प्रशिक्षण के दौरान फॉल्ट यानी । समस्या पता करने का बेहतर अभ्यास करने पर आप मोबाइल देखते ही उसकी समस्या की तह तक पहुंच जाएंगे। इससे आपका वक्त बचेगा तथा आप प्रभावी तरीके से सेवा दे पाएंगे। गौरतलब है कि मोबाइल को सुधारते समय असली पुर्जी का ही प्रयोग करना चाहिए। जब भी आप महंगे मोबाइल की मरम्मत कर रहे हैं, तो खराब हुए पुर्जा की जगह पर उसी ब्रांड के असली पुर्जी का ही इस्तेमाल करें। उदाहरण के लिए अगर सैमसंग कंपनी के 'नोट सिरीज मोबाइल के स्पीकर में खराबी आ गई हो तो आप उसे ठीक करते समय उसी कंपनी का स्पीकर लगाएं। अगर आप कंपनी का ओरिजनल स्पीकर लगाएंगे, तो खर्च ज्यादा आएगा, जबकि लोकल स्पीकर बहुत कम कीमत में मिल जाएगा। परंतु सबसे अहम बात यह है कि कंपनी का ओरिजनल स्पीकर लगाने पर आपके किए गए काम के जल्द खराब होने की आशंका बहुत कम होगी। यह आपकी साख के लिए बहुत अच्छा होगा तथा उपभोक्ताओं में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

मोबाइल रिपेयरिंग की नई एवं एडवांस तकनीक को समझने के लिए आप मोबाइल एप अथवा यूट्यूब पर ट्यूटोरियल वीडियोज का भी सहारा ले सकते हैं। युट्यूब पर सभी प्रमुख कंपनियों के मोबाइल रिपेयरिंग के वीडियो उपलब्ध होते हैं। आप जिस कंपनी के जिस मॉडल की रिपेयरिंग के बारे में जानना चाहते हैं उस कंपनी का नाम डालकर यूट्यूब पर सर्च कर सकते हैं। अगर आप रोजाना कुछ समय इन वीडियो को देखेंगे, तो मोबाइल मरम्मत के अपने हुनर को और अधिक बेहतर बना पाएंगे। आप गूगल प्ले स्टोर से मोबाइल रिपेयरिंग एप भी डाउनलोड कर सकते हैं। उसका इस्तेमाल भी आपके प्रशिक्षण को आसान बनाएगा।

पहले सामान्य मोबाइल की मरम्मत करने पर जहां महीने में 15-20 हजार रुपये की आमदनी हो पाती थी, वहीं ब्रांडेड मोबाइल की रिपेयरिंग करने पर अब मोबाइल रिपेयर करने वाले आसानी से 25 से 50 हजार रुपये मासिक तक कमा लेते हैं। काम में अच्छे होने के साथ ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध रखने से भी आप ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित कर पाएंगे।

बगैर प्रशिक्षण के मोबाइल फोन की मरम्मत काम चलाऊ ही होती है। खासकर ब्रांडेड मोबाइल फोन की मरम्मत के लिए ट्रेनिंग लेना बहुत जरूरी है। हर छोटे-बड़े शहर में आईटीआई तथा कई प्राइवेट संस्थान इससे जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं। मोबाइल रिपेयरिंग के सर्टिफिकेट कोर्स तीन से छह माह के होते हैं। एडवांस कोर्स 1 से 2 वर्ष के होते हैं।

प्रमुख संस्थान। Mobile free course Hindi, tablet PC Repairing course in Delhi

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, दिल्ली ।
  • नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एन्टरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट, नोएडा ।
  • आईटीआई, नई दिल्ली नोटः इसके अलावा भी कई संस्थान हैं। जो मोबाइल रिपेयरिंग के कोर्स संचालित करते हैं।

0 comments:

Post a Comment

 
Top