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-कमल यदुवंशी
कोटा।
नगर निगम कोटा की ओर से रियासतकालीन 126 वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में मंगलवार देर शाम रावण के कुनबे के दहन का भव्य आयोजन किया गया। देखते-देखते मात्र 37 मिनट में रावण का अहंकार खाक हो गया। इस आयोजन के करीब डेढ़ लाख लोग साक्षी बने। युवक-युवतियों ने रावण दहन के दौरान अपने मोबाइल से सेल्फी भी ली।

भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी के साथ लाव लश्कर के साथ आए कोटा रियासत के पूर्व महाराव कुमार इज्यराजसिंह के ज्वारा पूजन के बाद रावण की नाभी के कलश को तीर से भेंदा। इसके बाद देखते ही देखते अहंकारी रावण का कुनबा जलकर राख होता चला गया। रावण दहन के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों की भीड़ से ठसा ठस दशहरा मैदान में विदेशी सैलानियों ने भी नगर निगम कोटा के इस भव्य आयोजन को करीब से देखा और खूब सराहा।

रात 8 बजकर 28 मिनट पर धमाके के साथ गिरा यानी करीब 37 मिनट में आतिशी धमाकों के साथ रावण का कुनबा खाक होकर धराशाही हो गया। विजयश्री रंगमंच पर काफी देर तक रंगीन आतिशबाजी भी देखने को मिली। लोगों ने इन यादगार पलों को केमरों में भी केद किया। 101 फीट के रावण व 55-55 फीट के कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों ने दहन से पहले मैदान में गर्दन घुमाना, तलवार चलाने के करतब दिखाएं व खूब अट्टहास किया।

विदेशी सैलानियों को भाया हमारा दशहरा
इस दफा भी इजरायल सहित कई देशों से सैलानी भी रावण दहन देखने पहुंचे। सैलानी सवारी के साथ रावण दहन स्थल पैदल ही पहुंचे। इन मेहमानों ने सवारी, दहन व मेला परिसर से कई तस्वीरे अपने केमरों में केद की। विदेशी मेहमानों ने दरीखाने में व रावण दहन स्थल पर खूब तस्वीरे कैमरों में केद की। सैलानियों को नगर निगम की ओर से साफा भी बंधवाया गया।

लोकसभा अध्यक्ष बिरला की राम के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील
मेला आयोजन समिति अध्यक्ष राममोहन मित्रा बाबला ने बताया कि रावण दहन स्थल के पास ही मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के लिए विशेष मंच तैयार किया गया। यहां से लोकसभा अध्यक्ष ने आमजन का अभिवादन किया। इस दौरान ओम बिरला ने आमजन से भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। इस अवसर पर विधायक संदीप शर्मा, मदन दिलावर, विधायक कल्पना देवी, महापौर महेश विजय, उपमहापौर सुनीता व्यास एवं निगम के आयुक्त भी मौजूद थे।

राजसी ठाट बाट से निकली भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी
रावण दहन से पूर्व शाम को गढ़ पैलेस के दरीखाने से राजसी वैभव व ठाटबाज के साथ भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी निकाली गई। कोटा राजपरिवार के पूर्व महाराव सहित हाड़ौतीभर से रियासत के पूर्व जमींदार, राजपूत सरदार परम्परागत राजसी वेशभूषा में नजर आए। शाम को दरीखाने से सवारी आरंभ हुई।

यहां रीति-रीवाज अनुसार खेजड़ी के वृक्ष का पूजन हुआ। इसके बाद भगवान लक्ष्मीनारायणजी की सवारी रवाना हुई। खुली जीप में पूर्व महाराज कुमार इज्यराजसिंह शाही पोशाक में थे। पीछे राजपूत सरदार चल रहे थे। लोक कलाकार हाड़ौती सांस्कृतिक छटा बिखरते हर किसी का ध्यान खींच रहे थे। बग्गी,घोड़े, झांकिया, उंटगाड़ी व बैंडबाजे शामिल हुए।



source https://lendennews.com/archives/60108

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