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मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, कांग्रेस और शिवसेना के बीच विभिन्न मुद्दों पर मानमनौव्वल का दौर चल ही रहा था कि शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ मिलकर अलग और बड़ा दांव चल दिया। अब अजित पवार के पास महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री की कुर्सी है। हालांकि, उन्हें एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना की ओर से मनाने की कोशिश की जा रही है लेकिन अजित अपने स्टैंड पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

इतना ही नहीं, डेप्युटी सीएम बनने पर अजित पवार ने बीजेपी नेताओं को ट्वीट करते हुए धन्यवाद भी कहा है। मतलब साफ है कि अजित पवार एनसीपी, शिवसेना, कांग्रेस के साथ ‘बैठक’ वाले दौर में वापस नहीं जाना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस जी को मुख्यमंत्री और अजित पवार जी को डेप्युटी सीएम बनने की बधाई।

यकीन है कि वे महाराष्ट्र के बेहतर भविष्य के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करेंगे।’ इस पर अजित पवार ने जवाब देते हुए कहा है, ‘आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बहुत-बहुत धन्यवाद। हम एक स्थिर सरकार सुनिश्चित करेंगे, जो कि महाराष्ट्र के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करेगी।’

ट्विटर पर भी डेप्युटी सीएम का जिक्र
एनसीपी नेता अजित पवार ने अपने ट्विटर प्रोफाइल में भी महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री होने की बात का जिक्र कर दिया है। अजित पवार को डेप्युटी सीएम बनने के बाद बीजेपी के कई नेताओं की ओर से बधाई दी गई है, जिसका उन्होंने धन्यवाद कहकर जवाब दिया है।

17 नवंबर को ही अजित पवार ने दिए थे संकेत
अजित पवार ने पुणे में शरद पवार के घर पर 17 नवंबर को हुई एनसीपी की बैठक में अपने भविष्य के कदम के बारे में बहुत हद तक संकेत दे दिया था। बैठक में अजित ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि एनसीपी को शिवसेना और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बजाय अगली सरकार बनाने में बीजेपी की मदद करनी चाहिए।

उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया क्योंकि तबतक एनसीपी, शिवसेना, कांग्रेस के बीच बातचीत आखिरी चरण में पहुंच चुकी थी। इनके बीच दिल्ली और मुंबई में कई दौर की बातचीत हो चुकी थी। भले ही अजित के सुझाव को शरद पवार ने तब सिरे से खारिज कर दिया लेकिन वह खतरे को भांपने में नाकाम हो गए। उसके एक हफ्ते के भीतर ही अजित पवार ने बगावत कर शरद पवार और एनसीपी को हक्का-बक्का कर दिया।

वैसे पुणे की मीटिंग में एनसीपी नेतृत्व न सिर्फ अजित पवार के मन में क्या चल रहा है, उसे पढ़ने में नाकाम रहा, बल्कि बाद के अन्य संकेतों को भी नहीं पढ़ पाया। मुंबई में शरद पवार के घर पर भी हुई छोटी बैठकों में धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने भी वैसी ही राय रखी जो अजित पवार ने पुणे बैठक में रखी थी।



source https://lendennews.com/archives/62685

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