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कोटा। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा “नीट-यूजी” पर मद्रास हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि उपरोक्त मेडिकल प्रवेश परीक्षा “गरीब-परीक्षार्थियों” के हित में नहीं है। केंद्र सरकार को उपरोक्त परीक्षा के आयोजन पर पुनर्विचार करना चाहिए। मद्रास हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी नीट-2019 में छद्मवेश में परीक्षा देने के मामले में सुनवाई करते हुए गत सोमवार को दी है।

ज्ञात रहे कि तमिलनाडु के “थेनी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज” में उदित सूर्या नाम के फर्जी विद्यार्थी के प्रवेश से संबंधित एक याचिका मद्रास हाईकोर्ट में दायर है। वस्तुतः यह मामला “परीक्षा किसी और विद्यार्थी ने दी,सफलता प्राप्त की किंतु उसके स्थान पर प्रवेश किसी और विद्यार्थी ने लिया” जैसे गंभीर फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है। मद्रास हाई कोर्ट ने पूर्व में उपरोक्त फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से विद्यार्थियों से जुड़े हुए सभी साक्ष्य एवं तथ्य मांगे थे तथा जांच सीबी-सीआईडी को सौंपी थी।

आंकड़ों के अनुसार बिना कोचिंग सफलता संभव नहीं
कैरियर पॉइंट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट देव शर्मा ने बताया कि मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एडिशनल डायरेक्टर ऑफ मेडिकल-एजुकेशन ने नीट-यूजी 2019 में तमिलनाडु से संबंधित सफल विद्यार्थियों के आंकड़ों को पेश किया। उपरोक्त आंकड़ों से आंकलन के पश्चात ही मद्रास हाई कोर्ट ने नीट-यूजी को लेकर गरीब विरोधी टिप्पणी की। देव शर्मा ने बताया कि तमिलनाडु के “23- गवर्नमेंट” मेडिकल कॉलेजों में कुल 3081 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।

कुल विद्यार्थियों में से मात्र “48-विद्यार्थी” ऐसे थे जिन्होंने बिना मेडिकल कोचिंग के प्रवेश परीक्षा दी और सफल हुए। प्रतिशत की दृष्टि से देखा जाए तो “बिना-कोचिंग” के सफल होने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत मात्र और “मात्र 1.5%” है। अर्थात यदि गरीब विद्यार्थी महंगी कोचिंग लेने की क्षमता नहीं रखता है तो नीट-प्रवेश परीक्षा में उसके सफल होने की संभावना ना के बराबर है। उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने “मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट” के औचित्य पर केंद्र सरकार को पुनर्विचार करने के लिए कहा है।

विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रावधान की आवश्यकता
आंकड़ों के अध्ययन से ज्ञात होता है कि तमिलनाडु के 3081 कुल सफल विद्यार्थियों में 1040 विद्यार्थीयों ने यह प्रवेश परीक्षा प्रथम प्रयास में 12वीं बोर्ड की परीक्षा के साथ सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। किंतु शेष 2041 विद्यार्थियों ने उपरोक्त प्रवेश परीक्षा या तो द्वितीय प्रयास में उत्तीर्ण की या तृतीय और चतुर्थ में।

देव शर्मा ने बताया कि मद्रास हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि 12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों पर बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा का भी बोझ रहता है जबकि 12वीं बोर्ड उत्तीर्ण करने के पश्चात परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों पर सिर्फ और सिर्फ प्रतियोगी परीक्षा का दबाव रहता है।

ऐसी स्थिति में 12वीं के साथ तथा 12वीं के बाद परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों का समान स्तर पर आंकलन निश्चित तौर पर ठीक नहीं है। केंद्र सरकार को इस पर विचार कर विवेकपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता है। 12वीं बोर्ड के साथ नीट-परीक्षा में प्रथम प्रयास कर रहे विद्यार्थियों के कुछ विशेष छूट की आवश्यकता है।



source https://lendennews.com/archives/61809

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