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नई दिल्ली। घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार खिलौनों और टीवी सेट्स जैसे कुछ इलेक्ट्रॉनिक गुड्स के आयात में कमी कर सकती है। मलयेशिया और इंडोनेशिया से पाम ऑइल के आयात पर रोक लगाए जाने के बाद से कई अन्य सामानों के आयात को कम करने को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। खबरें हैं कि इस बारे में पहले ही चर्चा हो चुकी हैं।

क्रूड पाम ऑइल पहले फ्री ट्रेड लिस्ट में शामिल था, लेकिन अब उसे उस लिस्ट से बाहर कर रिस्ट्रिक्टेड आइटमों की लिस्ट में डाल दिया गया है। यानी अब पाम ऑइल के आयात के लिए लाइसेंसिंग की जरूरत होगी।

पाम ऑइल के आयात पर रोक का कराण कश्मीर, सीएए पर मलयेशिया की टिप्पणियां थीं, लेकिन कुछ अधिकारियों ने बताया कि पाम ऑइल आयात पर रोक लगाने के कारणों में घरेलू रिफाइनर्स को बढ़ावा देना भी एक प्रमुख कारण है, कम से कम शॉर्ट रन में। इसके अलावा, सरकार पाम ऑइल पर निर्भरता कम करने के उपायों पर भी काम कर रही है ताकि अन्य एडिबल ऑइल्स का उत्पादन व इस्तेमाल बढ़ाया जा सके।

सूत्रों का कहना है कि खिलौनों के आयात पर रोक लगाने के लिए कई सुझाव मिले हैं। इसके लिए क्वॉलिटी कंट्रोल और अन्य स्तरों पर कई कदमों पर विचार किया जा रहा है। कुछ सिंगल ब्रैंड रूट एफडीआई के तहत आने वाले कुछ प्रमुख स्टोर्स के पास चीनी खिलौनों का बड़ा स्टॉक है और सरकार उन्हें प्रतिबंधित की श्रेणी में शिफ्ट करने के बारे में सोच रही है।

कॉमर्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष के दौरान खिलौनों, गेम्स और स्पोर्ट्स के सामानों आदि का 4500 करोड़ रुपये का आयात किया गया था। इसमें से करीब 3200 करोड़ डॉलर का सामान चीन से आया था।

इसी तरह टीवी सेट्स जैसे वाइट गुड्स बनाने वाली घरेलू कंपनियां भी चीन और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के सस्ते आयात पर निर्भर रहती हैं। सस्ते आयात पर लगाम लगाने के लिए हालाकि सरकार ने कोशिशें कीं लेकिन कई मामलों में यह कारगर साबित नहीं हुई।

आयात पर लगाम कसने के लिए सरकार ने आयात शुल्क बढ़ाने का तरीका अपनाया, लेकिन कई मामलों में फायदा नहीं हुआ। उदाहरण के तौर पर, सैमसंग ने लोकल मैन्युफैक्चरिंग के बजाय आयात का फैसला किया, ताकि फ्री ट्रेड अग्रीमेंट के तहत वह फायदा उठा सके।



source https://lendennews.com/archives/65535

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