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नई दिल्ली। कारोबारी साल 2020-21 का आम बजट पेश होने के बाद देश के शेयर बाजारों में शनिवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। जानकारों के मुताबिक बाजार की उम्मीदों पर बजट के खरा नहीं उतरने से शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। बीएसई का सेंसेक्स 987.96 गिरावट के साथ 39,735.53 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 318.30 अंकों की गिरावट के साथ 11,643.80 पर बंद हुआ। इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स ने 1,092.25 अंकों की गिरावट के साथ 39,631.24 का निचला स्तर छुआ।

शेयर बाजार आमतौर पर शनिवार को बंद रहता है, लेकिन बजट के कारण शनिवार को शेयर बाजार विशेष रूप से कारोबार के लिए खुला रहा। फॉरेक्स बाजार इस दौरान साप्ताहांत के कारण बंद रहे। जानकारों के मुताबिक कारोबारियों को उम्मीद थी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बाजार में तेजी लाने के लिए कुछ बड़े उपायों की घोषणा करेंगी, लकिन निवेशकों में इस मोर्चे पर निराशा हासिल हुई।

सेंसेक्स में आईटीसी रहा टॉप लूजर
सेंसेक्स में आईटीसी में सर्वाधिक 6.97 फीसदी गिरावट रही। लार्सेन एंड टुब्रो 5.98 फीसदी, एचडीएफसी 5.87 फीसदी, भारतीय स्टेट बैंक, ओएनजीसी और आईसीआईसीआई बैंक चार फीसदी से अधिक लुढ़के। इंडसइंड बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट और एक्सिस बैंक 3 फीसदी तक लुढ़के। रिलायंस इंडस्ट्रीज में दो फीसदी से अधिक गिरावट रही। दूसरी ओर टीसीएस में सर्वाधिक 4.13 फीसदी तेजी रही। हिंदुस्तान यूनीलिवर, नेस्ले इंडिया और टेक महिंद्रा में 1 फीसदी से अधिक तेजी रही।

रियल्टी शेयरों में सर्वाधिक गिरावट
बीएसई में 2 को छोड़कर बाकी सभी सेक्टरों में गिरावट रही। रियल्टी सेक्टर सर्वाधिक 7.82 फीसदी टूटा। पूंजीगत वस्तु सेक्टर में 4 फीसदी से अधिक, बेसिक मटीरियल्स, फाइनेंस, औद्योगिक, बैंकिंग और मेटल में 3 फीसदी से अधिक गिरावट रही। दूसरी ओर आईटी सेक्टर में सर्वाधिक 1.41 फीसदी गिरावट रही। टेक्नोलॉजी सेक्टर में 1.08 फीसदी गिरावट रही।

जिसका डर था वही हुआ, वित्तीय घाटे में भारी बढ़ोतरी
कारोबारी साल 2020-21 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चालू कारोबारी साल में वित्तीय घाटा 3.8 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि बजट में 3.3 फीसदी वित्तीय घाटे का लक्ष्य रखा गया था। वही अगले कारोबारी साल के लिए वित्तीय घाटे का लक्ष्य 3.5 फीसदी रखा गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ खास सरकारी प्रतिभूतियों को विदेशी निवेशकों के लिए खोल दिया गया। सरकार ने कॉरपोरेट बांड में एफपीआई के निवेश की सीमा को बढ़ाकर मौजूदा 9 फीसदी से 15 फीसदी कर दिया। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के एमडी कृष्णा कुमार कारवा के मुताबिक लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में कोई राहत नहीं मिलने से निवेशकों में निराशा रही।



source https://lendennews.com/archives/66564

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