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दिल्ली। निर्भया दुष्कर्म केस में दोषियों की फांसी टालने के मामले में हाईकोर्ट बुधवार को अपना फैसला सुनाएगा। इस संबंध में केंद्र सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पटियाला हाउस कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें निर्भया के चारों दोषियों की फांसी पर रोक लगाई गई थी।

इस याचिका पर शनिवार और रविवार को विशेष सुनवाई हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस बीच, दोषियों की फांसी टलने का मामला मंगलवार को राज्यसभा में भी उठा। आम आदमी पार्टी ने इस मामले में राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस से हस्तक्षेप की मांग की।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा- चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। लेकिन, सजा पर अमल में लगातार देरी हो रही। उन्होंने कहा- इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। संजय सिंह ने कहा कि 16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना के बाद पूरा देश सड़कों पर आ गया था। लेकिन, दोषियों की फांसी बार-बार टलती जा रही है। सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है। कोर्ट के आदेश पर तुरंत अमल होना चाहिए।

कोर्ट ने निर्भया के माता-पिता को जल्द आदेश पारित करने का आश्वासन दिया
इससे पहले मंगलवार को निर्भया के माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट से केंद्र की याचिका के जल्द निपटारे को लेकर गुहार लगाई थी, ताकि दोषियों को जल्द फांसी दी जा सके। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निर्भया के अभिभावकों को यह आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द आदेश पारित किया जाएगा।

ट्रायल कोर्ट ने 31 जनवरी को चारों दोषियों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगाई थी
बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने पिछले महीने 7 जनवरी को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में सभी चार दोषियों को फांसी देने के लिए ब्लैक वारंट जारी किया था। हालांकि, एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित रहने की वजह से उन्हें फांसी नहीं दी जा सकी।

बाद में ट्रायल कोर्ट ने 17 जनवरी को दोषियों की फांसी की तारीख 1 फरवरी तय की। लेकिन 31 जनवरी को फिर से पटियाला हाउस कोर्ट ने यह कहते हुए कि तीन दोषियों पवन, विनय और अक्षय की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी कि अभी भी इनके कानूनी विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

चारों दोषियों की मौजूदा स्थिति
-मुकेश सिंह और विनय शर्मा के दोनों विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो चुके हैं।
-अक्षय ठाकुर की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो चुकी है। दया याचिका राष्ट्रपति के पास विचाराधीन।
-पवन गुप्ता ने न तो क्यूरेटिव पिटीशन दायर की है और न ही राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है।



source https://lendennews.com/archives/66736

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